Saturday, June 4, 2011

यह है बाबा रामदेव, योग गुरु, एक नेता या ड्रामा करने वाले नाटककार.


पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के रामलीला मैदान में एक लीला चल रही है। यह लीला भी रामलीला की तरह से एक नाटक ही है। परन्तु एक फर्क है रामलीला में जहां धार्मिक भावना का जुडाव है और नितिज्ञान है। वही इस समय के नाटक में केवल सत्ता लोलुपता और बड़ा बनने की महत्वकांक्षा है। इस महत्वाकांक्षी ड्रामे के प्रणेता बाबा रामदेव हैं जो योग गुरु के नाम से पुरे विश्व में मशहूर हैं। योग गुरु के रूप में मशहूर होने वाले बाबा रामदेव को अचानक देश से प्रेम जागा और उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों को छुआ। यह मुद्दे अपने आप में काफ़ी बड़े थे और हैं इसमें कोई दो राय नहीं है। परन्तु उन मुद्दों में बाबा रामदेव को सबसे पसंदीदा मुद्दे स्विस बैंको में जमा भारतीय रिश्वतखोरो का पैसा वापस लाना और ५००, १००० के नोटों का चलन बंद करना रहा। इधर बीत कुछ समय में भारत में जिस तरीके से मीडिया के द्वारा एक से एक बड़े घोटालों का जब खुलासा हुआ तब भ्रष्टाचार की लपट ने पुरे देश के जनमानस को गर्म कर दिया। लोगो ने इन घोटालों को देखते हुए इन सबो से छुटकारा पाने के लिए छटपटाना शुरू कर दिया।
जनता की इसी छटपटाहट को भुनाने और जनता में चेहरा चमकाने को बाबा रामदेव निकल पड़े। उन्होंने पुरे देश में जमकर यात्राएं की इन यात्राओं के पीछे बाबा ने योग सिखाने के नाम पर एक नकाब ओढा और योग सीखकर निरोग होने आई जनता को उन्होंने अपने गुरु के रूप में दिए भाषणों में घुट्टी पिलाना शुरू कर दिया। बाबा रामदेव धीरे धीरे पुरे देश में भ्रष्टाचार के विरोध में खड़े होने वाले अकेले योद्धा के रूप में दिखने लगे थे। तभी अचानक अन्ना हजारे ने बीच में आक़र बाबा के सारे पके पकाए कार्यक्रम में सेंधमारी कर दी। अन्ना ने भ्रष्टाचार की मारी आम जनता को भ्रष्टाचार मिटाने का शिगूफा छेड दिया। जनता ने अन्ना का जाप करना शुरू कर दिया और उन्हें महान मानना शुरू कर दिया। बाबा रामदेव जो इस मुद्दे को लेकर पूरी तैयारी कर रहे थे जनता में उतरने के लिए उन्हें पीछे हटना पड़ा। अन्ना हजारे भ्रष्टाचार मिटाने के सबसे बड़े नायक बन गए, और जनता उन्हें तारणहार के रूप मानने लगी। परन्तु लोकपाल विधेयक जिसके सहारे अन्ना देश से भ्रष्टाचार मिटाना चाहते थे। वह एक दुरूह प्रक्रिया में फंसकर कहीं हल्का हो गया और जनता ने उसे भूलना भी शुरू कर दिया।
लोकपाल की देरी और जनता के द्वारा इसको भूलते जाने की बातों ने बाबा रामदेव को नया मौका दे दिया। बाबा रामदेव अपने पुराने भ्रष्टाचार मिटाओ के मुद्दे के जिन्दा होने की संभावना को लेकर दुबारा मैदान में कूद गए। अब चूँकि भ्रष्टाचार का मुद्दा अन्ना पहले ही ले उड़े तो उस मुद्दे में खुच खास ना बचा होने के कारण बाबा ने दूसरी ओर नज़र डाला। यहाँ पर उनको एक ऐसा मुद्दा दिखा जिसको लेकर पूरा देश काफ़ी समय से बातें कह रहा है। वह मुद्दा था स्विस बैंको में जमा काला धन। तो बाबा ने अब देर ना करते हुए अपने इसी मुद्दे को तूल देते हुए ४ जून के धरने का एलान कर दिया। बाबा के पीछे खड़ी उनके शिष्यों की फौज और हाल में ही अन्ना की मार झेल चुकी सरकार ने बाबा से बचने के लिए हर प्रकार का मन मनौवल करना शुरू कर दिया। परन्तु इस मुद्दे से मसीहा बनने की इच्छा रखने वाले रामदेव ४ जून को अनशन में आ जुटे। सुबह ४ बजे के योग से शुरू हुए इस अनशन में प्रतिपल बाबा का नजरिया बदलता रहा कभी सरकार के साथ तो कभी सरकार के विरोध में बाबा दिखाई दिए।
इस सारे ड्रामे के बीच असली रोमांचक क्षण तो तब आया जब केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने शाम को पत्रकारों को बाबा रामदेव की वह चिट्ठी दिखाई जिसमे सरकार द्वारा उनकी मांगे मान लेने की सूरत में यह अनशन केवल प्रतिकताम्क रूप से करने और दोपहर तक समाप्त करने का वायदा किया गया। अब रामदेव के इस चिट्ठी के जारी होते ही हडकंप मचा गया। जो न्यूज़ चैनल सुबह से उन्हें मसीहा बनाने में तूले थे वह उन्हें इस चिट्ठी के बाद झूठा कहने में उतनी ही तन्मयता से जुट गए। केंद्र सरकार के मंत्रियों के इस प्रकार के बाबा के चिट्ठी खोल देने से बाबा कैम्प में बौखलाहट मच गयी। जब हर ओर यह सवाल उठने लगे कि अगर बाबा ने पहले से ही अपने अनशन को फिक्स कर रखा था तो यह बात जनता को बाबा ने स्वयं क्यों नहीं बताई। बाबा के ऊपर इस प्रकार के बढते दबाव से बाबा रामदेव की बौखलाहट बढती गयी और बाबा ने अनशन बढाने और तरह की धमकियाँ मंच से सरकार को दें डाली। बाबा की बौखलाहट यह साफ़ बता रही है की मामला तो कुछ और ही है।
बाबा का यह सारा अनशन का ड्रामा केवल उनके महिमामंडन के लिए था काले धन के लिए कम। क्योंकि इतना तो बाबा रामदेव भी जानते हैं विदेशो से काला धन लाना इतना आसान तो नहीं है। लेकिन प्रचार के भूखे बाबा जो खुद अपने संगठन में बिकवाली और भ्रष्टाचार को रोक नयी पाए वह देश के भ्रष्टाचार को क्या रोकेंगे। यह बात समझ से परे है.

अगर भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर खूब तमाशा होता है, तो भ्रष्टाचार अच्छा है ना.


टी०वी० पर एक विज्ञापन देखने को मिलता है। जिसमे बच्चों को कपडे पर कीचड के दाग लगने के डर को खत्म करने के लिए दाग लगने के फायदे बताये जाते हैं और अंत में पंच लाइन बोली जाती है "की अगर दाग लगने से खुशी मिलती हो तो दाग अच्छे है ना" यह विज्ञापन एक कपडे धोने का पाउडर बनाने वाली कंपनी का होता है जो अपने फायदे यानी दाग लगने पर कपडे धोने के लिए बिकने वाले पाउडर के आद में दाग के फायदे बच्चो को समझाने में जुटी है। कंपनी के लोग यह मानते होंगे की बच्चे भोले होते हैं और यह विज्ञापन देखकर कीचड में दौड लगाकर और गंदे गड्ढे में घुसकर या बालपन की गर्ल फ्रेंड की साइकिल को छूकर अपने कपड़ों में दाग लगवाकर खुशी ढूंढ लेंगे। जिससे बाद में उनके अभिभावक बच्चो के कपडे धुलने के लिए पाउडर खरीदकर कंपनी का मुनाफा बढ़ाकार कंपनी को भी खुश कर देंगे। यानी इस सारे बेचने और खरीदने या बाजारीकरण नियमावली में अगर कपडे धोने वाली कंपनी को फायदा चाहिए तो उसे मात्र दाग में खुशी ढूँढने वाले बच्चे और फिर पाउडर खरीदने वाले माँ बाप चाहिए।
वाशिंग पाउडर के विज्ञापन ने इस समय देश के बड़े नारे को बहुत बेहतरीन आइडिया दिया है। वह नारा है "भ्रष्टाचार मिटाओ और काला धन देश में लाओ" इस नारे को लेकर कोई साबुन कंपनी तो नहीं परन्तु देश में दो तारणहार लोगो ने अपना नाम खूब फैलाया (उत्पाद के रूप में बेचा) कुछ दिन पहले जब भारत में विश्व कप का जूनून उतरा ही था और आईपीएल का चढ़ने वाला था उसी समय टाइमिंग का ध्यान रखकर एक बुज़ुर्ग सज्जन अवतरित हुए जिन्होंने भ्रष्टाचार को धुलकर मिटाने का प्रण लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया। यह सज्जन यानी श्री अन्ना हजारे जी के अनशन को लेकर देश में जबरदस्त लहर चली। आखिर चले भी क्यों ना उस समय जनता जी, कामनवेल्थ गेम, आदर्श हाउसिंग जैसे तमाम घोटाले के दाग को लेकर उबल ही रही थी। तब अन्ना जी इन दागो को धोने के लिए अपने पाउडर यानी जनलोकपाल को जनता के सामने पेश किया। जनता भी उस टी०वी० वाले बच्चे की तरह पाउडर कंपनी की बातों को मानकर दाग से खेलने लगी की अब तो पाउडर है ही भ्रष्टाचार धो जाएगा। इसी तरह सरे दाग वाले बच्चे जंतर-मंतर जो उस समय बहुत बड़ा कपडे धोने का घाट बना था वहां इकठ्ठा हो गए। इसी के साथ तरह तरह के नारे देश भर में लगने लगे। अन्ना जी के पाउडर जन लोकपाल को लेकर सरकार जो तैयार बैठी उसने अन्ना जी को लोकपाल पाउडर बनाने के लिए न्योता दे दिया और अन्ना जी अपने कंपनी के कुछ चुनिन्दा डाइरेक्टरो के साथ उस पाउडर बनाने के लिए चले गए। अन्ना जी के पाउडर के बनने में काफ़ी समय लगने और केवल उनके चुनिन्दा बन्ना लोगो के उनके साथ होने से जनता धीरे धीरे भ्रष्टाचार रुपी दाग के साथ फिर से जीने की आदि होती चली गयी। साथ एक अनंत इन्तेज़ार में डूब गयी की कब अन्ना आयेंगे और लोकपाल पाउडर लायेंगे और भ्रष्टाचार मिटायेंगे।
इस भ्रष्टाचार के दाग को धोने के लिए आज यानी जून से बाबा रामदेव ने नया पाउडर लाने को कहा है। साथ बाबा ने नए दाग यानी विदेशो से काला धन लाने को भी धो देने को बताया है। रामदेव के सारे कार्यक्रम या यूँ कहे भ्रष्टाचार मिटाने के उनके कारनामे का सारा विज्ञापन एक आधुनिकतम स्टूडियों में चल रहा है। जहां उन्होंने भ्रष्टाचार मिटाने के उत्पाद के साथ अपने पुराने या मदर उत्पाद योग को भी बेचना जारी रखा हैं। रादेव यह जानते हैं कि अगर वह अपने मदर उत्पाद को छोड देंगे तो जनता भी छूट जायेगी इसीलिए रामदेव अपने उस उत्पाद को हमेशा साथ लेकर ही चलते हैं। बाबा रामदेव के भ्रष्टाचार मिटाने के अभियान में उन्होंने यह नहीं बताया की जो काले धन का दाग विदेश में हैं यानी दूसरे देश में हैं उसे भारत में वह कैसे मगायेंगे। उस देश पर क्या बाबा हमला करवाएंगे या कुछ और क्योंकि वहां का सारा पैसा तो वहां के बैंकिंग नियमों से बंधा है। भारत में तो उनकी कंपनी चूँकि योग के उत्पाद बेचती है और उनका पूरा बाजार कुछ ऐसे ही लोगो पर निर्भर जिन्हें अपने कपड़ो में भ्रष्टाचारी दाग लगवाना अच्छा लगता है। यानी विज्ञापन के वह बच्चे जो दाग को पसंद करते हैं पाउडर के साथ। बाबा के पुरे संगठन को हमेशा से ऐसे भ्रष्टाचार पसंद लोगो का ही समर्थन मिला है। दूसरी तरफ उनके संगठन के सारे पदाधिकारी भी सेठो के ही किनारे घूमकर अपने कपडे भी भ्रष्टाचारी दाग से गंदे करवाकर वह आनंद लेना चाहते हैं जैसा इस वाशिंग पाउडर के विज्ञापन में कंपनी बच्चे को दिलवाती है।
हमारे देश में भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर जो इस वाशिंग पाउडर की कंपनी की तर्ज़ पर आंदोलन चल रहे हैं। उससे भ्रष्टाचार कितना मिटेगा यह तो नहीं कह सकते परन्तु हाँ यह जरूर हैं दाग को अच्छा बताकर भ्रष्टाचार में लिप्त होना और बाद में पाउडर बेचकर नाम कमाना ही इस सारे काम के पीछे दीखता है। यानी जब भ्रष्टाचार के नाम पर खोब तमाशा होकर नाम बिकता ही है तो भ्रष्टाचार अच्छा है ना।

Wednesday, June 1, 2011

यह क्या नौटंकी चालू है भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर.


भारत में भ्रष्टाचार है और पूरे देश में काफ़ी गहरे तक इसकी पकड़ है। यह पकड़ यहाँ तक है की भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बनने की राह पर है। कई उत्साही विचारकों ने तो अब भ्रष्टाचार वैधता प्रदान करने के बारे में समर्थन करने लगे हैं। ऐसे भ्रष्टाचार के दोराहे पर पहुंचे हमारे देश में आजकल भ्रष्टाचार मिटाने का वायरस काफ़ी जो पकड़ रहा है। वर्ल्ड कप क्रिकेट के बाद हमारे देश में एक बुज़ुर्ग समाजसेवी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना शुरू कर दिया। और उन्होंने अन्न जल सब त्यागकर आमरण अनशन को करने का संकल्प लिय कि जब तक सरकार भ्रष्टाचार को मिटाने की सबसे बड़ी छड़ी यानी जन लोकपाल बिल नहीं बनाएगी तब तक वह अनशन नहीं तोड़ेंगे। अन्ना जी ने उस समय जन लोकपाल को लेकर इतना तांडव करवाया की आम जनता को लगने लगा बस अब लोकपाल आया नहीं की भ्रष्टाचार गायब। परन्तु आज इतने दिन बीतने के बाद भी जनलोकपाल बिल का कहीं अता पता नहीं चला सका है जिससे कुछ निराशा भी लोगो में तेज़ी से बढ़ रही थी और आम आदमी फिर से भ्रष्टाचार को अपनी नियति मानकर जीने को मजबूर था।
इसी माहौल में बाबा रामदेव ने कल ४ जून से दिल्ली में एक अनशन का एलान करके पुरे देश में शोर मचा दिया है। देश भर के न्यूज़ चैनल दिखाने में जुटे हैं कि बाबा रामदेव कितने बड़े मसीहा है। रामदेव भी गला फाडकर चिल्लाने में जुटे हैं कि कैसे वह भ्रष्टाचारी को जेल में भेजेंगे और विदेशो का काला धन वापस मंगाएंगे। बाबा के इस चिल्लाहट पर सारी मीडिया इकट्ठी हो गयी और बाबा के योग वाले कार्यक्रमों की टी०आर०पी० को देख सारे चैनल इसी को भूनाने में जुट गए हैं। हर तरफ शोर हो रहा है कि बाबा से सरकार दरी फलां मंत्री बात करने आये। बाबा का पंडाल तैयार कल से शुरू होगा आमरण अनशन यही सब चोंचलेबाजी न्यूज़ के नाम पर जारी थी।
बाबा रामदेव के अनशन को लेकर सरकार से बात चल रही है। सरकार भी बाबा के साथ उभरे जनसमर्थन को देखकर नतमस्तक है और टी०वी० पर जुटी जनता भी बाबा को ठीक उसी तरह संकटमोचक मान रही है जैसे उसने अन्ना को मान लिया था। इस सारे मुद्दे यह मुद्दे कहीं खो जाते हैं कि कैसे विदेशो में जमा काला धन जो उनके देशों के बैंकिंग सेवा नियमों से बंधे हैं भारत वापस आयेंगे। बाबा और उनके गला फाडू चिल्लाहट से तो कहीं यह लगने लगता है कि भारत स्विस देशो पर हमला करके वहां से पैसा लाएगा। जबकि ऐसी कोई बात संभव नहीं है तब इस प्रकार का ड्रामा क्यों रचा जाता है। बाबा रामदेव जब स्वयं यात्रा पर निकले थे उनके जिलों में कार्यकर्ताओं ने उनके रुकने और ठहरने की जगहों तक बोली लगाई थी जिससे पैसे कमाए गए। बाबा के आज संगठन का सारा दारोमदार उन टैक्स चोर सेठो के जिम्मे हैं जो गरीबो का हर प्रकार का शोषण करते हैं। बाबा की सारी फार्मेसी और इनके जितने भी पदाधिकारी हैं वह इन्ही सेठो के आगे पीछे घुमते हैं। जब बाबा स्वयं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले सेठो के सहारे खड़े हैं तो वह कैसे खुद भ्रष्टाचार को मिटाने के मसीहा बनने को कह रहे हैं। देश देश चिल्लाने वाले बाबा रामदेव खुद ही देश के आम गरीब से मिलने का रास्ता नहीं निकालते हैं बल्कि खुद ही धन्ना सेठो के आस-पास खड़े रहने वाले बाबा का ड्रामा कल से कैसा रंग लाएगा यह देखने वाला है। वैसे भी मदारी के तमाशाप्रिय हमारे देश में ऐसे आंदोलन तर्क से नहीं भावना से बड़े हो जाते हैं.