Wednesday, June 1, 2011

यह क्या नौटंकी चालू है भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर.


भारत में भ्रष्टाचार है और पूरे देश में काफ़ी गहरे तक इसकी पकड़ है। यह पकड़ यहाँ तक है की भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बनने की राह पर है। कई उत्साही विचारकों ने तो अब भ्रष्टाचार वैधता प्रदान करने के बारे में समर्थन करने लगे हैं। ऐसे भ्रष्टाचार के दोराहे पर पहुंचे हमारे देश में आजकल भ्रष्टाचार मिटाने का वायरस काफ़ी जो पकड़ रहा है। वर्ल्ड कप क्रिकेट के बाद हमारे देश में एक बुज़ुर्ग समाजसेवी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना शुरू कर दिया। और उन्होंने अन्न जल सब त्यागकर आमरण अनशन को करने का संकल्प लिय कि जब तक सरकार भ्रष्टाचार को मिटाने की सबसे बड़ी छड़ी यानी जन लोकपाल बिल नहीं बनाएगी तब तक वह अनशन नहीं तोड़ेंगे। अन्ना जी ने उस समय जन लोकपाल को लेकर इतना तांडव करवाया की आम जनता को लगने लगा बस अब लोकपाल आया नहीं की भ्रष्टाचार गायब। परन्तु आज इतने दिन बीतने के बाद भी जनलोकपाल बिल का कहीं अता पता नहीं चला सका है जिससे कुछ निराशा भी लोगो में तेज़ी से बढ़ रही थी और आम आदमी फिर से भ्रष्टाचार को अपनी नियति मानकर जीने को मजबूर था।
इसी माहौल में बाबा रामदेव ने कल ४ जून से दिल्ली में एक अनशन का एलान करके पुरे देश में शोर मचा दिया है। देश भर के न्यूज़ चैनल दिखाने में जुटे हैं कि बाबा रामदेव कितने बड़े मसीहा है। रामदेव भी गला फाडकर चिल्लाने में जुटे हैं कि कैसे वह भ्रष्टाचारी को जेल में भेजेंगे और विदेशो का काला धन वापस मंगाएंगे। बाबा के इस चिल्लाहट पर सारी मीडिया इकट्ठी हो गयी और बाबा के योग वाले कार्यक्रमों की टी०आर०पी० को देख सारे चैनल इसी को भूनाने में जुट गए हैं। हर तरफ शोर हो रहा है कि बाबा से सरकार दरी फलां मंत्री बात करने आये। बाबा का पंडाल तैयार कल से शुरू होगा आमरण अनशन यही सब चोंचलेबाजी न्यूज़ के नाम पर जारी थी।
बाबा रामदेव के अनशन को लेकर सरकार से बात चल रही है। सरकार भी बाबा के साथ उभरे जनसमर्थन को देखकर नतमस्तक है और टी०वी० पर जुटी जनता भी बाबा को ठीक उसी तरह संकटमोचक मान रही है जैसे उसने अन्ना को मान लिया था। इस सारे मुद्दे यह मुद्दे कहीं खो जाते हैं कि कैसे विदेशो में जमा काला धन जो उनके देशों के बैंकिंग सेवा नियमों से बंधे हैं भारत वापस आयेंगे। बाबा और उनके गला फाडू चिल्लाहट से तो कहीं यह लगने लगता है कि भारत स्विस देशो पर हमला करके वहां से पैसा लाएगा। जबकि ऐसी कोई बात संभव नहीं है तब इस प्रकार का ड्रामा क्यों रचा जाता है। बाबा रामदेव जब स्वयं यात्रा पर निकले थे उनके जिलों में कार्यकर्ताओं ने उनके रुकने और ठहरने की जगहों तक बोली लगाई थी जिससे पैसे कमाए गए। बाबा के आज संगठन का सारा दारोमदार उन टैक्स चोर सेठो के जिम्मे हैं जो गरीबो का हर प्रकार का शोषण करते हैं। बाबा की सारी फार्मेसी और इनके जितने भी पदाधिकारी हैं वह इन्ही सेठो के आगे पीछे घुमते हैं। जब बाबा स्वयं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले सेठो के सहारे खड़े हैं तो वह कैसे खुद भ्रष्टाचार को मिटाने के मसीहा बनने को कह रहे हैं। देश देश चिल्लाने वाले बाबा रामदेव खुद ही देश के आम गरीब से मिलने का रास्ता नहीं निकालते हैं बल्कि खुद ही धन्ना सेठो के आस-पास खड़े रहने वाले बाबा का ड्रामा कल से कैसा रंग लाएगा यह देखने वाला है। वैसे भी मदारी के तमाशाप्रिय हमारे देश में ऐसे आंदोलन तर्क से नहीं भावना से बड़े हो जाते हैं.

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