
टी०वी० पर एक विज्ञापन देखने को मिलता है। जिसमे बच्चों को कपडे पर कीचड के दाग लगने के डर को खत्म करने के लिए दाग लगने के फायदे बताये जाते हैं और अंत में पंच लाइन बोली जाती है "की अगर दाग लगने से खुशी मिलती हो तो दाग अच्छे है ना"। यह विज्ञापन एक कपडे धोने का पाउडर बनाने वाली कंपनी का होता है जो अपने फायदे यानी दाग लगने पर कपडे धोने के लिए बिकने वाले पाउडर के आद में दाग के फायदे बच्चो को समझाने में जुटी है। कंपनी के लोग यह मानते होंगे की बच्चे भोले होते हैं और यह विज्ञापन देखकर कीचड में दौड लगाकर और गंदे गड्ढे में घुसकर या बालपन की गर्ल फ्रेंड की साइकिल को छूकर अपने कपड़ों में दाग लगवाकर खुशी ढूंढ लेंगे। जिससे बाद में उनके अभिभावक बच्चो के कपडे धुलने के लिए पाउडर खरीदकर कंपनी का मुनाफा बढ़ाकार कंपनी को भी खुश कर देंगे। यानी इस सारे बेचने और खरीदने या बाजारीकरण नियमावली में अगर कपडे धोने वाली कंपनी को फायदा चाहिए तो उसे मात्र दाग में खुशी ढूँढने वाले बच्चे और फिर पाउडर खरीदने वाले माँ बाप चाहिए।
वाशिंग पाउडर के विज्ञापन ने इस समय देश के बड़े नारे को बहुत बेहतरीन आइडिया दिया है। वह नारा है "भ्रष्टाचार मिटाओ और काला धन देश में लाओ" इस नारे को लेकर कोई साबुन कंपनी तो नहीं परन्तु देश में दो तारणहार लोगो ने अपना नाम खूब फैलाया (उत्पाद के रूप में बेचा)। कुछ दिन पहले जब भारत में विश्व कप का जूनून उतरा ही था और आईपीएल का चढ़ने वाला था उसी समय टाइमिंग का ध्यान रखकर एक बुज़ुर्ग सज्जन अवतरित हुए जिन्होंने भ्रष्टाचार को धुलकर मिटाने का प्रण लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया। यह सज्जन यानी श्री अन्ना हजारे जी के अनशन को लेकर देश में जबरदस्त लहर चली। आखिर चले भी क्यों ना उस समय जनता २ जी, कामनवेल्थ गेम, आदर्श हाउसिंग जैसे तमाम घोटाले के दाग को लेकर उबल ही रही थी। तब अन्ना जी इन दागो को धोने के लिए अपने पाउडर यानी जनलोकपाल को जनता के सामने पेश किया। जनता भी उस टी०वी० वाले बच्चे की तरह पाउडर कंपनी की बातों को मानकर दाग से खेलने लगी की अब तो पाउडर है ही भ्रष्टाचार धो जाएगा। इसी तरह सरे दाग वाले बच्चे जंतर-मंतर जो उस समय बहुत बड़ा कपडे धोने का घाट बना था वहां इकठ्ठा हो गए। इसी के साथ तरह तरह के नारे देश भर में लगने लगे। अन्ना जी के पाउडर जन लोकपाल को लेकर सरकार जो तैयार बैठी उसने अन्ना जी को लोकपाल पाउडर बनाने के लिए न्योता दे दिया और अन्ना जी अपने कंपनी के कुछ चुनिन्दा डाइरेक्टरो के साथ उस पाउडर बनाने के लिए चले गए। अन्ना जी के पाउडर के बनने में काफ़ी समय लगने और केवल उनके चुनिन्दा बन्ना लोगो के उनके साथ होने से जनता धीरे धीरे भ्रष्टाचार रुपी दाग के साथ फिर से जीने की आदि होती चली गयी। साथ एक अनंत इन्तेज़ार में डूब गयी की कब अन्ना आयेंगे और लोकपाल पाउडर लायेंगे और भ्रष्टाचार मिटायेंगे।
इस भ्रष्टाचार के दाग को धोने के लिए आज यानी ४ जून से बाबा रामदेव ने नया पाउडर लाने को कहा है। साथ बाबा ने नए दाग यानी विदेशो से काला धन लाने को भी धो देने को बताया है। रामदेव के सारे कार्यक्रम या यूँ कहे भ्रष्टाचार मिटाने के उनके कारनामे का सारा विज्ञापन एक आधुनिकतम स्टूडियों में चल रहा है। जहां उन्होंने भ्रष्टाचार मिटाने के उत्पाद के साथ अपने पुराने या मदर उत्पाद योग को भी बेचना जारी रखा हैं। रादेव यह जानते हैं कि अगर वह अपने मदर उत्पाद को छोड देंगे तो जनता भी छूट जायेगी इसीलिए रामदेव अपने उस उत्पाद को हमेशा साथ लेकर ही चलते हैं। बाबा रामदेव के भ्रष्टाचार मिटाने के अभियान में उन्होंने यह नहीं बताया की जो काले धन का दाग विदेश में हैं यानी दूसरे देश में हैं उसे भारत में वह कैसे मगायेंगे। उस देश पर क्या बाबा हमला करवाएंगे या कुछ और क्योंकि वहां का सारा पैसा तो वहां के बैंकिंग नियमों से बंधा है। भारत में तो उनकी कंपनी चूँकि योग के उत्पाद बेचती है और उनका पूरा बाजार कुछ ऐसे ही लोगो पर निर्भर जिन्हें अपने कपड़ो में भ्रष्टाचारी दाग लगवाना अच्छा लगता है। यानी विज्ञापन के वह बच्चे जो दाग को पसंद करते हैं पाउडर के साथ। बाबा के पुरे संगठन को हमेशा से ऐसे भ्रष्टाचार पसंद लोगो का ही समर्थन मिला है। दूसरी तरफ उनके संगठन के सारे पदाधिकारी भी सेठो के ही किनारे घूमकर अपने कपडे भी भ्रष्टाचारी दाग से गंदे करवाकर वह आनंद लेना चाहते हैं जैसा इस वाशिंग पाउडर के विज्ञापन में कंपनी बच्चे को दिलवाती है।
हमारे देश में भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर जो इस वाशिंग पाउडर की कंपनी की तर्ज़ पर आंदोलन चल रहे हैं। उससे भ्रष्टाचार कितना मिटेगा यह तो नहीं कह सकते परन्तु हाँ यह जरूर हैं दाग को अच्छा बताकर भ्रष्टाचार में लिप्त होना और बाद में पाउडर बेचकर नाम कमाना ही इस सारे काम के पीछे दीखता है। यानी जब भ्रष्टाचार के नाम पर खोब तमाशा होकर नाम बिकता ही है तो भ्रष्टाचार अच्छा है ना।
वाशिंग पाउडर के विज्ञापन ने इस समय देश के बड़े नारे को बहुत बेहतरीन आइडिया दिया है। वह नारा है "भ्रष्टाचार मिटाओ और काला धन देश में लाओ" इस नारे को लेकर कोई साबुन कंपनी तो नहीं परन्तु देश में दो तारणहार लोगो ने अपना नाम खूब फैलाया (उत्पाद के रूप में बेचा)। कुछ दिन पहले जब भारत में विश्व कप का जूनून उतरा ही था और आईपीएल का चढ़ने वाला था उसी समय टाइमिंग का ध्यान रखकर एक बुज़ुर्ग सज्जन अवतरित हुए जिन्होंने भ्रष्टाचार को धुलकर मिटाने का प्रण लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया। यह सज्जन यानी श्री अन्ना हजारे जी के अनशन को लेकर देश में जबरदस्त लहर चली। आखिर चले भी क्यों ना उस समय जनता २ जी, कामनवेल्थ गेम, आदर्श हाउसिंग जैसे तमाम घोटाले के दाग को लेकर उबल ही रही थी। तब अन्ना जी इन दागो को धोने के लिए अपने पाउडर यानी जनलोकपाल को जनता के सामने पेश किया। जनता भी उस टी०वी० वाले बच्चे की तरह पाउडर कंपनी की बातों को मानकर दाग से खेलने लगी की अब तो पाउडर है ही भ्रष्टाचार धो जाएगा। इसी तरह सरे दाग वाले बच्चे जंतर-मंतर जो उस समय बहुत बड़ा कपडे धोने का घाट बना था वहां इकठ्ठा हो गए। इसी के साथ तरह तरह के नारे देश भर में लगने लगे। अन्ना जी के पाउडर जन लोकपाल को लेकर सरकार जो तैयार बैठी उसने अन्ना जी को लोकपाल पाउडर बनाने के लिए न्योता दे दिया और अन्ना जी अपने कंपनी के कुछ चुनिन्दा डाइरेक्टरो के साथ उस पाउडर बनाने के लिए चले गए। अन्ना जी के पाउडर के बनने में काफ़ी समय लगने और केवल उनके चुनिन्दा बन्ना लोगो के उनके साथ होने से जनता धीरे धीरे भ्रष्टाचार रुपी दाग के साथ फिर से जीने की आदि होती चली गयी। साथ एक अनंत इन्तेज़ार में डूब गयी की कब अन्ना आयेंगे और लोकपाल पाउडर लायेंगे और भ्रष्टाचार मिटायेंगे।
इस भ्रष्टाचार के दाग को धोने के लिए आज यानी ४ जून से बाबा रामदेव ने नया पाउडर लाने को कहा है। साथ बाबा ने नए दाग यानी विदेशो से काला धन लाने को भी धो देने को बताया है। रामदेव के सारे कार्यक्रम या यूँ कहे भ्रष्टाचार मिटाने के उनके कारनामे का सारा विज्ञापन एक आधुनिकतम स्टूडियों में चल रहा है। जहां उन्होंने भ्रष्टाचार मिटाने के उत्पाद के साथ अपने पुराने या मदर उत्पाद योग को भी बेचना जारी रखा हैं। रादेव यह जानते हैं कि अगर वह अपने मदर उत्पाद को छोड देंगे तो जनता भी छूट जायेगी इसीलिए रामदेव अपने उस उत्पाद को हमेशा साथ लेकर ही चलते हैं। बाबा रामदेव के भ्रष्टाचार मिटाने के अभियान में उन्होंने यह नहीं बताया की जो काले धन का दाग विदेश में हैं यानी दूसरे देश में हैं उसे भारत में वह कैसे मगायेंगे। उस देश पर क्या बाबा हमला करवाएंगे या कुछ और क्योंकि वहां का सारा पैसा तो वहां के बैंकिंग नियमों से बंधा है। भारत में तो उनकी कंपनी चूँकि योग के उत्पाद बेचती है और उनका पूरा बाजार कुछ ऐसे ही लोगो पर निर्भर जिन्हें अपने कपड़ो में भ्रष्टाचारी दाग लगवाना अच्छा लगता है। यानी विज्ञापन के वह बच्चे जो दाग को पसंद करते हैं पाउडर के साथ। बाबा के पुरे संगठन को हमेशा से ऐसे भ्रष्टाचार पसंद लोगो का ही समर्थन मिला है। दूसरी तरफ उनके संगठन के सारे पदाधिकारी भी सेठो के ही किनारे घूमकर अपने कपडे भी भ्रष्टाचारी दाग से गंदे करवाकर वह आनंद लेना चाहते हैं जैसा इस वाशिंग पाउडर के विज्ञापन में कंपनी बच्चे को दिलवाती है।
हमारे देश में भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर जो इस वाशिंग पाउडर की कंपनी की तर्ज़ पर आंदोलन चल रहे हैं। उससे भ्रष्टाचार कितना मिटेगा यह तो नहीं कह सकते परन्तु हाँ यह जरूर हैं दाग को अच्छा बताकर भ्रष्टाचार में लिप्त होना और बाद में पाउडर बेचकर नाम कमाना ही इस सारे काम के पीछे दीखता है। यानी जब भ्रष्टाचार के नाम पर खोब तमाशा होकर नाम बिकता ही है तो भ्रष्टाचार अच्छा है ना।
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