
नेपाल में संविधान के र्निमाण के लिए बनी संविधान सभा की समय सीमा गत 28 मई को समाप्त हो गई। संविधान सभा के कार्यकाल में संविधान का कोई मसौदा तैयार ना हो पाने की स्थिति में नेपाल के सभी दलो के सभासदों की बैठक में इस संविधान सभा का कार्यकाल 3 माह के लिए बढ़ाये जान का फ़ैसला हुआ। इस सभा की समयसीमा समाप्त हो जाने और संविधान का कोई मसौदा ना तैयार हो पाने के कारण नेपाल के राजनीतिक दलों के सामने एक प्रश्न चिन्ह लग गया था। 28 मई को नेपाल के समयनुसार सुबह 8 बजे शुरू हुई बैठक मध्य रात्रि से अधिक समय तक चलती रही। इस बैठक में ने0क0पा0 (माओवादी), ने0क0पा0 (एमाले), नेपाली कांग्रेस, मधेशी दल सहित सारी पार्टियों के सभासद उपस्थित रहे।
अंत में 29 मई की सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर बैठक की समाप्ति के बाद प्रमुख दलो के नेताओं की ओर से हस्ताक्षर के साथ एक पांच बिंदुओं वाला समझौता पत्र जारी किया गया। इस समझौते में पहले बिंदु में नेपाल में तीन महीने में शान्ति व्यवस्था को बहाल करने के बारे में कहा गया है। दूसरे बिंदु में तीन महीने के कार्यकाल में संविधान सभा को नेपाल के बनने वाले नये संविधान का पहला मसौदा देश के सामने रखना होगा। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु में नेपाली सेना में समायोजन की उचित व्यवस्था के बारे में कहा गया है, जिसमें मधेशी लोगों का भी उचित प्रतिनिधित्व हों। यहां गौरतलब है कि नेपाल में पूर्व राजशाही के विद्रोही माओवादी सेना के करीब 19200 लड़ाकुओं को अब नेपाल सेना में शामिल करने को लेकर असमंजस बरकरार है। चैथे बिंदु में संविधान सभा के वर्तमान में समाप्त हो रहे कार्यकाल को तीन महीने के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। पांचवे और अंतिम बिंदु में राष्ट्रीय सहमति से देश में सरकार का गठन और प्रधान मंत्री का र्निवाचन करने की बात कही गई है। इस समझौते पर ने0क0पा0 (माओवादी) की ओर से पुष्प कमल दहाल ‘‘प्रचण्ड़’’, नेपाली कांग्रेस की ओर गिरिजा प्रसाद कोईराला और ने0क0पा0 (एमाले) की ओर प्रधानमंत्री झलानाथ खनाल से अपने हस्ताक्षर किये हैं।
नेपाल में संवैधानिक संकट का दौर काफ़ी समय से चला आ रहा है। यहां के राजनैतिक माहौल में काफ़ी अनिश्चितता बनी हुई है। माओवादीयों के द्वारा संविधान लागू करने और शांति कायम करने में लगातार असफ़ल रहने के कारण अब आम ज़नता में उनके प्रति विश्वास काफ़ी कम हो गया है। नेपाल के सबसे बड़े दल नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी (माओवादी) के र्शीर्ष नेताओं में ही टकराव इतना बढ़ चुका है कि अब वह खुले रूप से दिखने लगा है। नेपाल मीड़ीया की रिर्पोट के अनुसार नेपाल सेना में माओवादी लड़ाकुओं के शामिल करने को लेकर भी सेना के बड़े अधिकारियों और माओवादीयों के र्शीष नेतृत्व में भी मतभेद बना हुआ है।
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