Tuesday, May 24, 2011

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का उत्तर प्रदेश में हो रहा बंटाधार, भ्रष्टाचार से पूरी योजना नष्ट होने की कगार पर।




केन्द्र सरकार द्वारा किसानो की उन्नति और कृषि के विकास के लिए चलाई जा रही ‘‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’’ आज बरबाद हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के 71 जिलो के लगभग 840 ब्लाको में इस योजना के द्वारा किसानो को उत्तम कृषि तकनीकी ज्ञान देने की व्यवस्था थी। परन्तु अगर इस योजना के बारे में जानने के लिए उत्तर प्रदेश के 71 जिलों में कोई चिन्ह नहीं मिलेगा। इस बहुउद्देशीय योजना में लगे पैसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ गये हैं।

केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय उद्यानिकी के तहत अपने कार्यक्रमो को पूरा करने के लिए 11 वीं योजना में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का पदार्पण किया। इस योजना के अनुसार पूरे देश में 2500 करोड रूपये के बजट के साथ इस योजना को आरंभ किया था। इस योजना के तहत किसानो को विशिष्ट रूप से तकनीकी ज्ञान देने की कार्ययोजना बनाई गयी थी।

उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत चलाये जाने वाले कार्यक्रमो के लिए कृषि निदेशालय को सबसे पहले जिम्मेदारी सौंपी गई। परन्तु कृषि निदेशालय ने तकनीकी क्षमता के ना होने और तकनीक कुशल व्यक्तियों की अनुपलब्धता के कारण इस योजना को किसी अन्य को देने का निर्णय लिया। ‘‘भारतीय कृषि वित्त निगम’’ के कृषि क्षेत्र में किये जा रहे कार्यो और इसके केन्द्र सरकार की एक डीम्ड संस्था के रूप में पहचान होने के कारण राज्य सरकार ने इस योजना का सारा दायित्व इस संस्था को दे दिया। चूंकि भारतीय कृषि वित्त निगम केन्द्र सरकार की एक डीम्ड संस्था थी इसीलिए इसे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना को उत्तर प्रदेश में लागू करने के लिए बिना किसी टेण्डर प्रक्रिया के जिम्मेदारी दी गई।

इस राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में भारतीय कृषि वित्त निगम द्वारा की जा रही घोर अनियमितता का पता उत्तर प्रदेश के कई जनपदो जैसे बहराइच, गोण्डा, बलरामपुर आदि का दौरा करने पर लगता है। यहां यह पता चलता है कि भारतीय कृषि वित्त निगम इस योजना को नही चला रहा है, बल्कि आई0टी0एस0 नामक दिल्ली की एक अपेक्षाकृत काफी छोटी फर्म इस योजना इस योजना को चला रही है। सरकार द्वारा भारतीय कृषि वित्त निगम को राष्ट्रीय कृषि विकास योजनाकी जिम्मेदारी मिलने के बाद इस संस्था को कैसे इस इतनी बडी योजना की जिम्मेदारी मिल गई। इस आई0टी0एस0 संस्था के बारे में सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार यह संस्था भारतीय कृषि वित्त निगम के बडे पदो पर बैइे लोगों की एक जेबी संस्था है। इस संस्था के द्वारा भारतीय कृषि वित्त निगम में सर्वोच्च पदो पर बैठे लोग इस योजना के तहत आने वाले रूपये से अपनी जेबे भरने में लगे है।

इस आई0टी0एस0 संस्था के कोई अधिकारी या कार्यालय उत्तर प्रदेश में नही है। साथ इस दिल्ली की संस्था को उत्तर प्रदेश के किसानो के बारे में जानकारी की भी कोई व्यवस्था नही हैं। केन्द्र सरकार द्वारा इस कृषि योजना को चलाने का उद्देश्य किसानो की बुनियादी जरूरतो को समझना था। साथ ही किसानो की स्थानीय स्तर पर समस्याओ को समझना और उन्हे विशेषज्ञो द्वारा विशेष रूप से तैयार करना भी था। जिससे किसानो की आय में वृद्धि हो तथा उनके जीवन स्तर में सुधार हो। जिसके लिए इस योजना की कार्यदायी संस्था को किसानो की उपज का उचित मूल्य दिलवाना और उनके उपज का उचित मार्केटिंग कराना भी संस्ािा की जिम्मेदारी थी। साथ ही साथ मौसम, कीटो और फसल के रोगो के संबंध में भी जानकारी दिलवाना संस्था का काम था। इस सारे कार्यो के लिए करोडो रूपये उपलब्ध कराये गये थे।

इस राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत हो रहे कार्यो के बारे में जब गांवो में जाकर पता लगाया गया तो पता चला कि ना तो आई0टी0एस0 और ना ही भारतीय कृषि वित्त निगम के अधिकारियों ने कभी क्षेत्र में जाकर कोई जानकारी ली है और ना ही कार्य किया है। इस योजना में विषय विशषज्ञो की क्षेत्रो मे कहीं नियुक्ति की ही नही गई है और यदि कहीं नियुक्ति हुई भी है तो वहां उन विशेषज्ञो को वेतन ही नही दिया गया जिससे उन लोगो ने भी अपना का म बंद कर दिया है। विषय विशेषज्ञो और किसानो को ट्रेनिंग के नाम पर आने वाले सारे पैसे को भारतीय कृषि वित्त निगम और आई0टी0एस0 के अधिकारियों ने मिल बांटकर लगातार खा रहें हैंै।

इस योजना के तहत विषय विशेषज्ञो को को गांवो का दौरा करना होता है। जिसमे वह लोग किसानो की समस्याओ को को समझने का प्रयास करते है और एक चुने हुए दिन को किसानो को बुलाकर जानकारी देना होता है। एक ब्लाक में प्रत्येक माह में कम से कम 18 ऐसे शिक्षण कार्यक्रम जो कम से कम 2 से 3 घंण्टे के होते हैं, उसे आयोजित करने की व्यवस्था इस योजना में है। इनक कार्यक्रमो में किसानो को पम्पलेट और किताबे भी बांटी जाती है। परन्तु जब इस योजना के बारे में किसानो ने बात की गई तो उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नही है। यह सारे कार्यक्रम केवल कागजो पर होते हैं जिससे सारा पैसा भारतीय कृषि वित्त निगम के उच्च पद वाले लोगो के जेब में जाता है। इस बारे में जनपद स्तरीय अधिकारियो को भी इस योजना के बारे मे कोई जानकारी नही है।

भारतीय कृषि वित्त निगम के द्वारा करोडो रूपये की इस लूट से उत्तर प्रदेश का कृषि विभाग अनजान बना हुआ है। जानकारी के अनुसार कृषि विभाग के कुछ उच्च पद वाले रिटायर लोग भारतीय कृषि वित्त निगम और आई0टी0एस के साथ जुडकर इस लूट में शामिल हैं। इस भारतीय कृषि वित्त निगम वित्त निगम ने प्रदेश में किसानो को तकनीकी ज्ञान देने के नाम पर करोडो रूपयो के फंड बिना उचित जांच के व्यापारिक संस्थाओ का दे दिये है। जिसके बारे में निगम के अधिकारियों ने चेताया भी था। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के नाम पर भारतीय कृषि वित्त निगम द्वारा की जा रही इस लूट को बंद होना चाहिए अन्यथा यह लूट लगातार चलती रहेगी।

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