भारत की अर्थव्यवस्था को को चोट पहुंचाने के लिए शत्रुओं के द्वारा भारी मात्रा में नकली भारतीय मुद्रा देश में फैलाने का कुचक्र लगातार चल रहा है। भारत में जाली नोट फैलाने का काम शत्रु देश के एजेण्टो और देश के गद्दारो के द्वारा किया जाता है। भारत की बढती अर्थिक शक्ति के कारण देश में नोटो की हो रही मांग के अनुरूप नोट की आपूर्ति सरकार द्वारा देश में छपे नोटो से नही हो पा रही है। इसी कारण सरकार द्वारा मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति के करीब 40 प्रतिशत नोटो को देश के बाहर के देशो के प्राइवेट प्रिंटरो से छपवा कर मंगाना पडता है। बाहर छपने वाले इन नोटो में सुरक्षा चिन्ह डालने का काम भी यही प्राइवेट ऐजेंसिया करती है। जिससे उन्हे भारतीय नोटो की पूरी जानकारी रहती है। जो बाद में शत्रु ऐजेण्टो के लिए भी नोट छापने लगते है।
भारत में आने वाले जाली नोटो को उनके देश में आने के रूट और स्तर के अनुसार तीन श्रेणियो में बांटा जा सकता है। प्रथम श्रेणी के नोट जिन्हे इन्ही विदेशी छापेखानो में छापा जाता है जिनमे भरतीय नोट छापे जाते है, अथवा भारतीय नोट छापने में प्रयुक्त होने वाले कागजो ओर इंक के सहारे दूसरे देशो के छापेखानो में छपते है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के लाहौर, करांची और इस्लामाबाद तथा सिंगापुर में प्रथम श्रेणी के यह नोट छापे जाते है। इन नोटो की छपाई काफी अच्छी होती है। इनमें और असली नोटो में फर्क कर पाना काफी मुश्किल होता है। इन नोटो पर लागत भी अधिक होती है 100 रूपये के इस जाली नोट पर लागत 60 रूपये आती है। इन नोटो को मुख्यतः जम्मू कश्मीर के रास्ते भारत में आने वाले आतंकियो को दिया जाता है। जिसे यह लोग अपने झुण्ड के साथ बैग में लादकर लाखो की जाली मुद्रा देश में लाते है। यही प्रथम श्रेणी के नोट अटैचीयों के द्वारा दूतावास के कर्मचारी पाकिस्तान से बांग्लादेश और नेपाल पहँुचाते हैं। जहाँ मौजूद आई0एस0आई0 के ऐजेण्ट इन्हे 70 रूपये प्रति सौ की दर से बेचकर भारत में चलाने के लिए भेज देते है। बांगलादेश में मौजूद ऐजेण्ट इन्हे बांगला देशी घुसपैठीयो को देकर भारत भेज देते वहीं नेपाल में तराई के 22 जिलो और पश्चिम बंगाल सीमा से सटे इलाको से यह भारत लाये जाते है। नेपाल में यह नोट पाकिस्तान, मलेशिया, श्रीलंका, यू0ए0ई0 और बहरीन के रास्ते लाये जाते है। जाली नोटो के खेल के मुख्य अड्डे भारत में मालदा, सिलीगुडी, तिनसुखिया, रक्सौल, सोनौली, बढनी और रूपईडीहा तथा नेपाल में थापा, वीरगंज, विराटनगर, नेपालगंज और गुलहरिया है।
द्वितीय श्रेणी में वह जाली नोट आते है जिनकी छपाई कहीं बाहर ना होकर भारत-नेपाल और भारत-बांगलादेश के सीमावर्ती क्षेत्रो में होती है। इन दूसरी श्रेणी के नोटो छापने के लिए डाई, उच्च स्तर की इंक और कागज आई0एस0आई0 के ऐजेण्टो के द्वारा लडकियो के मार्फत छपाई के केन्द्रो पर भेजे जाते है। इस प्रकार छपे नोटो की गुणवत्ता काफी कम होती है। यह नोट 40 रूपये प्रति 100 रूपये की दर पर तैयार होते है। इन नोटो को 50 रूपये प्रति 100 रूपये की दर पर ऐजेण्ट चलाने के लिए बेचते है। यह नोट उत्तर प्रदेश, बिहार, आसाम और पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रो से स्थानीय लोगो और ट्रक ड्राइवरो के जरिये पूरे देश में पहुँचता है। इस प्रकार के नोटो की सर्वाधिक खपत इन राज्यो में लगने वाले जानवरो की बाजार और ग्रामीण बाजारो में होती है। अधिकतर ग्रामीण जनता इन नोटो को पहचान नही सकती है, और इसका विनिमय आसानी से हो जाता है।
तृतीय श्रेणी में वह नोट आते हैं जिनको स्थानीय स्तर पर धोखेबाज लोग कम्प्यूटर, स्कैनर और स्कैनर के सहारे बनाते है। यह ज्यादातर ठगी में प्रयुक्त होते है जिसे असली नोटो के बंडलो के बीच में लगाकर लोगो को ठगते है।
प्रथम और द्वितीय श्रेणी के जाली नोट का मुख्य मार्ग नेपाल और बांगलादेश की सीमा होती है। पाकिस्तान में छपने वाले जाली नोट नेपाल के काठमाण्डू में लगातार पकडे जाते रहे है। नेपाल टी0वी0 के मालिक और पूर्व मंत्री रहे सलीम मियां अंसारी का पुत्र युनुस अंसारी अपने ड्राइवर और एक पाकिस्तानी नागरिक के साथ 25 लाख की जाली भरतीय मुद्रा के साथ पकडा जा चुका है। इसी प्रकार नेपाल के पूर्व राजकुमार राजकुमार पारस का नाम भी जाली नोटो के मामले में सामने आ चुका है। नेपाल में डी कम्पनी के खास रहे र्मिजा दिलशाद बेग के दाहिने हाथ के रूप में विख्यात रहे नकली भारतीय नोटो के मुख्य ऐजेण्ट माजिद मनिहार और उसके बेटेे विक्क्ी ने भी पारस को इस खेल में शामिल बताया था। माजिद मनिहार का नेपाल सीमा पर जाली नोटो का अच्छा नेटवर्क था। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर के पलिया, बहराइच के मिहींपुरवा और रूपईडीहा, सिद्र्धाथनगर के बढनी गोरखपुर के सोनौली, महराजगंज के नौतनवा से लेकर बिहार के रक्सौल के भारत‘नेपाल बार्डर तक जाली नोटो का मुख्य ऐजेण्ट रहा है माजिद। माजिद के बेटे विक्की की 28 अगस्त 2009 के गिरफ्तार होने के बाद होने वाले खुलासे के डर के कारण माजिद को भी कुछ माह उपरान्त अक्टूबर 2009 में माजिद की नेपालगंज के एक होटल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। माजिद के तार पाकिस्तान से लेकर खाडी के देशो तक फैले हुए थे और कहा जाता है कि माजिद के पास डी कम्पनी के जाली नोटो से संबंधित काफी सारे राज होने कारण ही उसकी हत्याा की गई। माजिद के बाद नेपाल में जाली नोटो के नये ऐजेण्ट की ताजपोशी को लेकर काफी सर्तकता बरती जा रही है।
जाली नोटांे का यह खेल अब केवल आई0एस0आई0 और उनके ऐजेण्टो तक ना सीमीत रहकर अब नये रूपो में आ गया है। अब आई0एस0आई0 के लोगो ने इस जाली नोटो के नेटवर्क को और सुचारू रूप से चलाने के लिए बैंको के जल्दी अमीर बनने की लालसा रखने वाले लोगो को अपने इस देश विरोधी खेल में शामिल कर लिया है। सिद्र्धाथनगर के डुमरियागंज की स्टेट बैंक की शाखा के कैशियर सुधाकर त्रिपाठी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था तथा इस बैंक के मुख्य कोष से करीब 70 लाख रूपये की जाली मुद्रा बरामद की थी। इसी प्रकार पुलिस ने बहराइच जनपद के इलाहाबाद बैंक के महरू मुर्तिहा शाखा के प्रबंधक को भी जाली नोट के मामले में ही गिरफ्तार किया था। बहराइच के ही एक बैंक की बडनापुर ब्रांच से और नानपारा के एक ब्रांच से एस0एस0बी0 के एक जवान को जाली नोट मिलने की घटना सामने आ चुकी है।
भारत में जाली नोट के नेटवर्क से देश विरोधी ताकते देश को कमजोर करने में जुटी हुई है। इन नोटो को देश में चलाने में भारतीय लोगो की संलिप्तता भी अब बढती जा रही है। नेपाल में भारतीय मुद्रा के साथ कई बार कई व्यक्ति पकडे जा चुके हैं। सितम्बर 2009 में काठमाण्डू के त्रिभुवन हवाई अड्डे पर पाकिस्तानी नागरिक अब्दुल गफ्फार 24 लाख 3 हजार 5 सौ की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडा गया। अक्टुबर 2009 में नेपाल के काभ्रे की कविता वर्मा 27 लाख 32 हजार की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडी गई। दिसम्बर 2009 में नेपाल टी0वी0 के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री सलीम मिया अंसारी का बेटा युनुस अपने ड्राईवर और एक पाकिस्तानी के साथ त्रिपुरेश्वरी होटल में जाली नोट के मामले में पकड़ा गया । जनवरी 2010 में पाकिस्तान एअरलाइन्स से काठमाण्डू आये पाकिस्तानी मोहम्मद सज्जाक और माहम्मद इकबाल 25 लाख की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडे गया। मार्च 2010 में काठमाण्डू के त्रिभुवन हवाई अड्डे पर पाकिस्तानी नागरिक मरियम 30 लाख की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडी गया। अप्रैल 2010 में नेपालगंज के न्यूरोड स्थित होटल क्लासिक में नेपाल पुलिस ने छापा मारकर मोहम्मद हामिद सहित 5 पाकिस्तानी और नेपाल के बारा निवासी विनोद मेहता को 9 लाख 98 हजार की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडा गया। मई 2010 में काठमाण्डू के त्रिभुवन हवाई अड्डे पर पाकिस्तानी नागरिक जीमल मोहम्मद 15 लाख की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडा गया। जुलाई 2010 में दुबई से 29 लाख की नकली भारतीय मुद्रा लेकर आये बांगलादेशी नागरिक मोहम्मद रफीक जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडा गया। अगस्त 2010 में पाकिस्तान के करांची निवासी विकलांग मोहम्मद फारूक अपने व्हील चेअर में छिपाकर 25 लाख की जाली भारतीय मुद्रा ला रहा था।
भारत में आने वाले जाली नोटो को उनके देश में आने के रूट और स्तर के अनुसार तीन श्रेणियो में बांटा जा सकता है। प्रथम श्रेणी के नोट जिन्हे इन्ही विदेशी छापेखानो में छापा जाता है जिनमे भरतीय नोट छापे जाते है, अथवा भारतीय नोट छापने में प्रयुक्त होने वाले कागजो ओर इंक के सहारे दूसरे देशो के छापेखानो में छपते है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के लाहौर, करांची और इस्लामाबाद तथा सिंगापुर में प्रथम श्रेणी के यह नोट छापे जाते है। इन नोटो की छपाई काफी अच्छी होती है। इनमें और असली नोटो में फर्क कर पाना काफी मुश्किल होता है। इन नोटो पर लागत भी अधिक होती है 100 रूपये के इस जाली नोट पर लागत 60 रूपये आती है। इन नोटो को मुख्यतः जम्मू कश्मीर के रास्ते भारत में आने वाले आतंकियो को दिया जाता है। जिसे यह लोग अपने झुण्ड के साथ बैग में लादकर लाखो की जाली मुद्रा देश में लाते है। यही प्रथम श्रेणी के नोट अटैचीयों के द्वारा दूतावास के कर्मचारी पाकिस्तान से बांग्लादेश और नेपाल पहँुचाते हैं। जहाँ मौजूद आई0एस0आई0 के ऐजेण्ट इन्हे 70 रूपये प्रति सौ की दर से बेचकर भारत में चलाने के लिए भेज देते है। बांगलादेश में मौजूद ऐजेण्ट इन्हे बांगला देशी घुसपैठीयो को देकर भारत भेज देते वहीं नेपाल में तराई के 22 जिलो और पश्चिम बंगाल सीमा से सटे इलाको से यह भारत लाये जाते है। नेपाल में यह नोट पाकिस्तान, मलेशिया, श्रीलंका, यू0ए0ई0 और बहरीन के रास्ते लाये जाते है। जाली नोटो के खेल के मुख्य अड्डे भारत में मालदा, सिलीगुडी, तिनसुखिया, रक्सौल, सोनौली, बढनी और रूपईडीहा तथा नेपाल में थापा, वीरगंज, विराटनगर, नेपालगंज और गुलहरिया है।
द्वितीय श्रेणी में वह जाली नोट आते है जिनकी छपाई कहीं बाहर ना होकर भारत-नेपाल और भारत-बांगलादेश के सीमावर्ती क्षेत्रो में होती है। इन दूसरी श्रेणी के नोटो छापने के लिए डाई, उच्च स्तर की इंक और कागज आई0एस0आई0 के ऐजेण्टो के द्वारा लडकियो के मार्फत छपाई के केन्द्रो पर भेजे जाते है। इस प्रकार छपे नोटो की गुणवत्ता काफी कम होती है। यह नोट 40 रूपये प्रति 100 रूपये की दर पर तैयार होते है। इन नोटो को 50 रूपये प्रति 100 रूपये की दर पर ऐजेण्ट चलाने के लिए बेचते है। यह नोट उत्तर प्रदेश, बिहार, आसाम और पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रो से स्थानीय लोगो और ट्रक ड्राइवरो के जरिये पूरे देश में पहुँचता है। इस प्रकार के नोटो की सर्वाधिक खपत इन राज्यो में लगने वाले जानवरो की बाजार और ग्रामीण बाजारो में होती है। अधिकतर ग्रामीण जनता इन नोटो को पहचान नही सकती है, और इसका विनिमय आसानी से हो जाता है।
तृतीय श्रेणी में वह नोट आते हैं जिनको स्थानीय स्तर पर धोखेबाज लोग कम्प्यूटर, स्कैनर और स्कैनर के सहारे बनाते है। यह ज्यादातर ठगी में प्रयुक्त होते है जिसे असली नोटो के बंडलो के बीच में लगाकर लोगो को ठगते है।
प्रथम और द्वितीय श्रेणी के जाली नोट का मुख्य मार्ग नेपाल और बांगलादेश की सीमा होती है। पाकिस्तान में छपने वाले जाली नोट नेपाल के काठमाण्डू में लगातार पकडे जाते रहे है। नेपाल टी0वी0 के मालिक और पूर्व मंत्री रहे सलीम मियां अंसारी का पुत्र युनुस अंसारी अपने ड्राइवर और एक पाकिस्तानी नागरिक के साथ 25 लाख की जाली भरतीय मुद्रा के साथ पकडा जा चुका है। इसी प्रकार नेपाल के पूर्व राजकुमार राजकुमार पारस का नाम भी जाली नोटो के मामले में सामने आ चुका है। नेपाल में डी कम्पनी के खास रहे र्मिजा दिलशाद बेग के दाहिने हाथ के रूप में विख्यात रहे नकली भारतीय नोटो के मुख्य ऐजेण्ट माजिद मनिहार और उसके बेटेे विक्क्ी ने भी पारस को इस खेल में शामिल बताया था। माजिद मनिहार का नेपाल सीमा पर जाली नोटो का अच्छा नेटवर्क था। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर के पलिया, बहराइच के मिहींपुरवा और रूपईडीहा, सिद्र्धाथनगर के बढनी गोरखपुर के सोनौली, महराजगंज के नौतनवा से लेकर बिहार के रक्सौल के भारत‘नेपाल बार्डर तक जाली नोटो का मुख्य ऐजेण्ट रहा है माजिद। माजिद के बेटे विक्की की 28 अगस्त 2009 के गिरफ्तार होने के बाद होने वाले खुलासे के डर के कारण माजिद को भी कुछ माह उपरान्त अक्टूबर 2009 में माजिद की नेपालगंज के एक होटल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। माजिद के तार पाकिस्तान से लेकर खाडी के देशो तक फैले हुए थे और कहा जाता है कि माजिद के पास डी कम्पनी के जाली नोटो से संबंधित काफी सारे राज होने कारण ही उसकी हत्याा की गई। माजिद के बाद नेपाल में जाली नोटो के नये ऐजेण्ट की ताजपोशी को लेकर काफी सर्तकता बरती जा रही है।
जाली नोटांे का यह खेल अब केवल आई0एस0आई0 और उनके ऐजेण्टो तक ना सीमीत रहकर अब नये रूपो में आ गया है। अब आई0एस0आई0 के लोगो ने इस जाली नोटो के नेटवर्क को और सुचारू रूप से चलाने के लिए बैंको के जल्दी अमीर बनने की लालसा रखने वाले लोगो को अपने इस देश विरोधी खेल में शामिल कर लिया है। सिद्र्धाथनगर के डुमरियागंज की स्टेट बैंक की शाखा के कैशियर सुधाकर त्रिपाठी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था तथा इस बैंक के मुख्य कोष से करीब 70 लाख रूपये की जाली मुद्रा बरामद की थी। इसी प्रकार पुलिस ने बहराइच जनपद के इलाहाबाद बैंक के महरू मुर्तिहा शाखा के प्रबंधक को भी जाली नोट के मामले में ही गिरफ्तार किया था। बहराइच के ही एक बैंक की बडनापुर ब्रांच से और नानपारा के एक ब्रांच से एस0एस0बी0 के एक जवान को जाली नोट मिलने की घटना सामने आ चुकी है।
भारत में जाली नोट के नेटवर्क से देश विरोधी ताकते देश को कमजोर करने में जुटी हुई है। इन नोटो को देश में चलाने में भारतीय लोगो की संलिप्तता भी अब बढती जा रही है। नेपाल में भारतीय मुद्रा के साथ कई बार कई व्यक्ति पकडे जा चुके हैं। सितम्बर 2009 में काठमाण्डू के त्रिभुवन हवाई अड्डे पर पाकिस्तानी नागरिक अब्दुल गफ्फार 24 लाख 3 हजार 5 सौ की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडा गया। अक्टुबर 2009 में नेपाल के काभ्रे की कविता वर्मा 27 लाख 32 हजार की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडी गई। दिसम्बर 2009 में नेपाल टी0वी0 के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री सलीम मिया अंसारी का बेटा युनुस अपने ड्राईवर और एक पाकिस्तानी के साथ त्रिपुरेश्वरी होटल में जाली नोट के मामले में पकड़ा गया । जनवरी 2010 में पाकिस्तान एअरलाइन्स से काठमाण्डू आये पाकिस्तानी मोहम्मद सज्जाक और माहम्मद इकबाल 25 लाख की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडे गया। मार्च 2010 में काठमाण्डू के त्रिभुवन हवाई अड्डे पर पाकिस्तानी नागरिक मरियम 30 लाख की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडी गया। अप्रैल 2010 में नेपालगंज के न्यूरोड स्थित होटल क्लासिक में नेपाल पुलिस ने छापा मारकर मोहम्मद हामिद सहित 5 पाकिस्तानी और नेपाल के बारा निवासी विनोद मेहता को 9 लाख 98 हजार की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडा गया। मई 2010 में काठमाण्डू के त्रिभुवन हवाई अड्डे पर पाकिस्तानी नागरिक जीमल मोहम्मद 15 लाख की जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडा गया। जुलाई 2010 में दुबई से 29 लाख की नकली भारतीय मुद्रा लेकर आये बांगलादेशी नागरिक मोहम्मद रफीक जाली भारतीय मुद्रा के साथ पकडा गया। अगस्त 2010 में पाकिस्तान के करांची निवासी विकलांग मोहम्मद फारूक अपने व्हील चेअर में छिपाकर 25 लाख की जाली भारतीय मुद्रा ला रहा था।
Beautiful writ-up. Keep it up.
ReplyDeleteSatish Pradhan
shahi g bahut acchha blog hai aap ka har article bahut hi bejod hai.
ReplyDeleteबेहतरीन रिपोर्ट...
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